नई पड़ोसन शादीशुदा भाभी को पटाकर चोदा

New Bhabhi Ki Chut Ki Kahani

न्यू भाभी की चूत की कहानी में पढ़ें कि मेरे बगल वाले घर में एक नई भाभी आयी ब्याह के! वो मुझे छत पर कसरत करते देखती थी. मैंने उसके कैसे पटाकर चोद मारा? New Bhabhi Ki Chut Ki Kahani

Original Antarvasna

दोस्तो, मैं युवराज, मेरी ये सेक्स कहानी न्यू भाभी की चूत की एक सच्ची घटना पर आधारित है.

आज से एक साल पहले जब मेरे पड़ोस में एक नई शादीशुदा सरोज नाम की भाभी आई थी तो मैं उसे देखता ही रह गया था.

सरोज भाभी के घर में उसकी बूढ़ी सास और पति ही था. उसका पति काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहता था.
वो अपने सेल्स के काम के चलते महीने में बीस दिन बाहर रहता था.

मेरे घर की छत और उसके घर साथ में ही लगी थी.
मैं रोज सुबह सुबह अपनी छत पर कसरत करता था.

अपनी शादी के एक महीने बाद ही सरोज ने निकलना शुरू कर दिया था.
वो सुबह के समय छत पर टहलने आया करती थी.

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एक बार मेरी नजर पड़ी.
वो मुझे ही छिप कर देख रही थी.
मैंने समझा कि भाभी मुझसे खुलना नहीं चाहती होगी शायद इसी लिए छिप कर देख रही है.

अगले दिन फिर से वही हुआ.
भाभी अपनी छत पर बने जीने की ममटी वाले कमरे के दरवाजे से छिप कर देख रही थी.

अब मुझसे रहा न गया, मैंने उसी तरफ जाकर भाभी से राम राम की- भाभी जी, राम राम!

भाभी एकदम से सकपका गई और धीमे स्वर में बोली- राम राम भैया जी.
मैंने कहा- आप मुझसे इतना क्यों शर्मा रही हैं. मैं तो आपका देवर हूँ.

भाभी हंस कर बोली- जी देवर जी.
मैंने कहा- आपको भी सुबह सुबह की ताज़ी हवा खाने की आदत है क्या?

भाभी बोली- हां अभी मां जी सो रही थीं और आपके भैया बाहर गए हैं तो मैं सुबह छत पर टहलने आ गई थी.
मैंने कहा- तो आप टहली कहां हैं?

वो बोली- जब आप नीचे चले जाएंगे तब टहल लूंगी.
मैंने कहा- क्यों ऐसा क्यों … क्या आपको मुझसे शर्म आती है क्या?

भाभी बोली- हां अभी नई नई बहू हूँ न … तो कोई देख कर कुछ कहने न लगे. इसलिए जरा पर्दा कर रही थी.
मैंने कहा- अरे भाभी आप शरमाओ मत. मैं आज ही आपके घर पर चाची से मिलने आता हूँ.

भाभी मेरी बात सुनकर खुश हो गई और नीचे चली गई.

फिर उसी दिन दस बजे के आस पास मैं भाभी के घर चली गया.
भाभी की सास के पैर छूकर मैं उनसे राम राम चाची कहा और उनके हाल चाल पूछे.

चाची बड़ी खुश हुईं और उन्होंने अपनी बहू को आवाज लगाई- सरोज बेटा, देख तो तेरा देवर युवी आया है.
भाभी झट से आ गई.
उसने एक लोअर टॉप पहना था.
बड़ी मस्त माल लग रही थी.

शायद उसने उस वक्त अपनी चूचियों को ब्रा से नहीं कसा था, जिस वजह से सरोज की चूचियों के कड़क निप्पल उसके टॉप से साफ़ नुमाया हो रहे थे.

मैंने चाची की नजर बचा कर सरोज भाभी के कड़क निप्पल देखे और आंख दबा दी.

ये देख कर भाभी एकदम से सकपका गई लेकिन अगले ही पल उसने मुस्कान दे दी.
अब मैंने भाभी को काफी हद तक झिझकने से मुक्ति दे दी थी.

कुछ देर बाद मैं भाभी के हाथ की बनी चाय पीकर और उनकी तारीफ़ करके वापस आ गया.
दूसरे दिन छत पर भाभी पहले से ही कल जैसी ड्रेस में खड़ी थी.

मैं आया तो भाभी राम राम करने लगी.

मैंने उसके पास जाकर राम राम की तो भाभी बोली- हरामी हो.
मैंने हंस दिया और कहा- क्या हरामीपन देख लिया भौजी?

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वो हंसी और उसने अपनी चूचियां हिला कर मुझे इशारा दिया कि कल क्या ताड़ रहे थे देवर जी?
मैंने कहा- अब ताड़ने वाली चीज को ही न ताड़ूंगा भौजी तो किस काम की मर्दानगी?

भाभी हंस दी और बोली- बड़े मर्द बने फिरते हो … कैसे मानूँ कि असली मर्द हो?
मैंने कहा- मर्द को समझने के लिए तो औरत को ही खुलना पड़ता है भौजी. तुम ही कुछ कहो कि मैं कैसे मर्दानगी साबित कर सकता हूँ?

भाभी मेरे लंड की तरफ देखने लगी. मैंने उसी पल अपने लौड़े को सहलाया और हाथ से ढक लिया.
वो हंसी और बोली- क्या हुआ … डर गए क्या?

मैंने उससे पूछ लिया कि तुम ऐसे खतरनाक नजर से देखोगी भौजी तो मैं तो डर ही जाऊंगा.
भाभी- क्यों मैंने ऐसे क्या देख लिया?

मैंने लंड से हाथ हटाया और कहा- क्या देख रही थी, तुम ही बताओ भौजी?
उसने कहा- मैंने तो आपकी बॉडी को देखा था. बहुत अच्छी बनाई है.
मैंने उससे पूछा- ठीक से देखना है क्या?

उसने बोला- कैसे दिखाओगे?
मैंने कहा- चलो आड़ में, दिखाता हूँ.

मैं उसकी छत पर कूद कर उसके जीने की ममटी में उसे ले आया और गेट लगा दिया.
मैंने उसी समय अपनी टी-शर्ट उतार दी.
वो देखती रह गई.

मैंने उससे कहा- छू कर देखो.
उसने जैसे ही छुआ, मैंने उसे सीने से लगा लिया.

वो बोली- कोई आ जाएगा.
मैंने कहा- कोई नहीं आएगा.

उसी समय मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से जोड़ दिया.
उसकी टी-शर्ट के ऊपर से ही मैंने उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.

वो सिहर उठी और उसकी सांसें तेज चलने लगीं.
मैंने कहा- सरू मजा आ रहा है?

वो बोली- हां कुछ मत बोलो … बस मुझे मन की कर लेने दो.

मैंने कहा- मन में क्या है?
वो बोली- मर्द की चाहत.

मैंने कहा- क्यों तेरा मर्द कुछ नहीं करता है?
वो बोली- करता होता तो गैरमर्द को देखती भी न!

मैंने कहा- अब मर्द को खा ले.
वो बोली- हां आज खा ही जाऊंगी.

मैं उसकी टी-शर्ट को ऊपर करने लगा, साथ ही उसकी गर्दन को किस करने लगा.

वो वासना से पागल होती जा रही थी, उसका हाथ मेरे लोअर की ओर जा रहा था और मेरा हाथ उसके ब्रा के हुक को खोलने की कोशिश में था.

जैसे ही उसका हुक खुला, उसकी ब्रा नीचे गिर गई और मैं उसके तने हुए मम्मों को देख कर पागल सा हो गया.

मैंने उसके मम्मों को कसके मसला और अपने होंठों में उसकी एक चूची के निप्पल को दबा लिया.

वो आह आह करके मुझे दूध चुखाने लगी.
मैं भी मस्ती से उसके दूध चूसने लगा.

दोस्तो, मुझे चूची को अपने होंठों और दांतों से काट कर खींचना पहुत पसंद है.

मैं उसकी चूची को काटते हुए खींचने लगा.
वो मदमस्त और पागल होती जा रही थी, खुद अपने हाथ से अपने दूध को पकड़ कर मेरे मुँह में दे रही थी.

अब उसका हाथ मेरे लोअर के अन्दर जाने लगा था.

उसका हाथ मेरे निक्कर के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगे थे.

मैंने उससे कहा- बस सहला कर ही देखोगी या पकड़ोगी भी?
उसने मेरे निक्कर में हाथ डाला और लंड पकड़ लिया.

उसने जैसे ही मेरा लंड पकड़ा, मैंने उसे नीचे बिठा दिया.
अब मैंने अपना लोअर नीचे उतारा और मेरा लंड फनफनाते हुए उसके सामने आ गया.

वो लंड देख कर डर गई और बोली- इतना बड़ा … मैं इसे नहीं ले पाऊंगी.
मैंने कहा- वो तो तेरी चूत बताएगी.

वो लंड देखती हुई बोली- हां ये तो है. पर फट जाएगी.
मैंने कहा- आज तक कभी किसी लुगाई की चूत मर्द के लंड से नहीं फटी.

वो लंड की मुठ मारने लगी.
मैंने उससे कहा- मुँह में लेकर प्यार करो इसे!

वो बोली- हां अब से ये मेरा ही है.
ये कह कर न्यू भाभी ने अपना मुँह खोला और जीभ से लंड को चाट लिया.

मैंने उसके मुँह को पकड़ा और गाल दबा कर उसके मुँह को पूरा खोल दिया.
वो कुछ समझ पाती कि मैंने अपना लंड उसके मुँह में ठूंस दिया.

वो गपागप मेरा लंड चूसने लगी.
तभी मैंने उसके बाल पकड़ कर अपना लंड उसके गले तक उतार दिया.

वो गों गों करके हाथ फटकारने लगी; उसकी सांस रुकने लगी थी.
मैंने लंड बाहर निकाल लिया.

उसकी ढेर सारी लार मेरे लंड पर लग गई थी, इससे मेरा लंड बहुत चिकना हो गया था.

वो बोली- मार ही दिया था.
मैंने कहा- अभी कहां भौजी … चूत मारूंगा तब बताना कि क्या हुआ?

वो हंस दी और लंड पकड़ने लगी.
मैंने उसको वहीं जमीन पर लिटा दिया और उसका लोअर और पैंटी उतार फैंकी.

जब मुझे उस न्यू भाभी की सफाचट चूत के दीदार हुए, तो वो गीली हो कर महक रही थी.

मैंने चूत पर हाथ फेरा और कहा- मुंडन करके आई हो भौजी?
वो हंसी और बोली- हां, सारी रात से तुम्हारे लंड के लिए रो रही है.

मैंने कहा- अब पहले इसकी चाशनी तो चटाओ मेरी जान!
सरोज भाभी ने टांगें फैला कर चूत खोल दी.

मैंने जैसे ही उसकी चूत को चूसा, वो तेज तेज सांसें लेने लगी.

मैंने तुरंत ही उसकी चूत में दो उंगली डालीं और उसकी चूत के होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
उसकी चूत बहुत गर्म और लाल हो रही थी.

मैंने उसकी चूत में अपनी पूरी जीभ घुसा दी. वो लंबी लंबी सिसकारियां लेने लगी.
अब मेरा लंड मीनार बन चुका था.

वो भी बोलने लगी थी कि अब देर मत करो, मुझसे रहा नहीं जा रहा.

उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रख दिया.
मैंने कुछ देर तक उसकी चूत पर लंड रगड़ा और एकदम से उसकी चूत में लंड ठूंस दिया.

वो तैयार नहीं थी, एकदम से लंड घुसेड़ देने से उसकी चीख निकल गई.
मैंने झट से उसका मुँह दबा लिया और उसको तेजी से चोदने लगा.

वो दर्द से कराहने लगी और बोली- एक महीने से पति चोद रहे हैं, तब तो इतना दर्द नहीं हुआ पर तुम्हारा लंड जाते ही चूत कांपने लगी.

मैं बिना रुके उससे चोदे जा रहा था.
वो भी कामुक सिसकारियां लिए जा रही थी.

अब मैंने उसके हाथ पकड़ कर उसे खड़ा किया और एक ग्रिल के सहारे टिका दिया.

उसका एक पैर मैंने हवा में करते हुए अपने हाथ से पकड़ लिया और उसको झुका कर लंड उसकी चूत में घुसा दिया.

वो एक बार और बहुत तेज़ से चिल्ला दी.

मैं चुदाई के साथ साथ उसकी चूची को दबा दबा कर ढीली कर रहा था.
उसके दूध को पीछे अपनी तरफ करके पीने लगा.

चुदाई की आवाज इतनी तेज़ थी कि आवाज नीचे के फ्लोर तक जा रही थी.

मैंने उससे कहा- मेरा रस छूटने वाला है, माल कहां डालूं?
वो बोली- मेरे अन्दर ही डाल दो.

मैं उसे और तेजी से चोदने लगा.
अब मेरा लावा उसकी चूत में गिरने वाला था, मैंने उसे कसके अपनी बांहों में भर लिया और उसकी चूत में पूरा माल डाल दिया.

चूत से मेरा माल वापस आते हुए टपकने लगा.
मैंने उससे पूछा- कैसा लगा मेरा प्यार?

वो मुझे चूमने लगी और खुशी से अपना प्यार देने लगी.
वो बोली- आज तक की जिदंगी में सबसे अच्छा सेक्स हुआ है.

मैंने कहा- अब तो इस न्यू भाभी की चूत का मैं हमेशा का हकदार बन गया?
वो बोली- हां … जब आपका मन हो, मेरी चूत का मजा ले लेना.

इसी वादे के साथ मैं छत से वापस नीचे आ गया.

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